दर्री तहसील में भ्रष्टाचार का आरोप ! किसान मोर्चा अध्यक्ष ने कलेक्ट्रेट में लगाई न्याय की गुहार
कोरबा : जिले के दर्री तहसील कार्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है। भारतीय जनता पार्टी बालको मंडल के किसान मोर्चा अध्यक्ष आर. ए. नारायण ने तहसील में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


शिकायत में तहसीलदार प्रियंका चंद्रा, पटवारी संदीप तिवारी एवं बाबू श्रीवास पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
“पैसे दो, तभी होगा काम” – आवेदक का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि जमीन संबंधी प्रकरण क्रमांक 202511053400036/बी/121/2024-25 में जानबूझकर देरी की जा रही है और कार्यवाही के नाम पर भारी रकम की मांग की जा रही है। आवेदक के अनुसार, उनसे पहले 22000 रुपये लिए गए, लेकिन इसके बाद भी संतुष्टि नहीं जताई गई और अधिक राशि की मांग की गई।
नकल आवेदन तक नहीं लिया जा रहा
आरोप है कि तहसील कार्यालय में नकल आवेदन तक स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय पाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। आवेदक ने इसे पूरी तरह से मनमानी और भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया।
पटवारी पर भी गंभीर आरोप
शिकायत में पटवारी संदीप तिवारी पर जमीन दलाली और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि उन्होंने भी 5000 रुपये की राशि ली और पूरे मामले को प्रभावित करने का प्रयास किया।
90 दिन से अधिक समय से लंबित प्रकरण
आवेदक का कहना है कि 90 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रकरण लंबित रखा गया है। बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिला, बल्कि “राशि बढ़ाने” के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
ग्रामीणों में भी आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते जैसे मूलभूत मुद्दों पर भी प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण समाधान नहीं हो पा रहा।
जिला प्रशासन से बड़ी मांग
- तहसीलदार प्रियंका चंद्रा को तत्काल हटाया जाए
- पटवारी संदीप तिवारी का स्थानांतरण किया जाए
- बाबू श्रीवास को भी पद से हटाया जाए
- किसी अनुभवी और ईमानदार अधिकारी की पदस्थापना की जाए
“भ्रष्टाचार मुक्त कोरबा” पर सवाल
इस पूरे मामले ने “भ्रष्टाचार मुक्त कोरबा” के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।
नोट : यह समाचार आवेदक द्वारा दिए गए लिखित शिकायत के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि संभव है।

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