Adani Power Expansion की जनसुनवाई आज : पहले दर्ज हुए विरोध, केंद्र की जांच और आधिकारिक आपत्तियों के बीच क्या प्रभावित लोग खुलकर दोहराएंगे अपनी बात ?

कोरबा। कोरबा पावर लिमिटेड (Adani Power Limited की सहायक कंपनी) की 1600 मेगावाट विस्तार परियोजना को लेकर आज आयोजित जनसुनवाई अब केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। इससे पहले इस परियोजना के खिलाफ आधिकारिक शिकायतें, श्रमिक संगठनों की लिखित आपत्तियां और केंद्र सरकार द्वारा compliance report मांगे जाने जैसे घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिन प्रभावित लोगों और संगठनों ने पहले विरोध दर्ज कराया था, क्या वे जनसुनवाई में खुलकर अपनी आपत्तियों को दोहराएंगे।
केंद्र सरकार ने मांगी compliance report, शिकायत को माना गंभीर
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार ने 20 फरवरी 2026 को आधिकारिक पत्र जारी कर रायपुर स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय को परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय स्वीकृतियों (Environmental Clearance) की शर्तों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई सार्वजनिक शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें Draft Environmental Impact Assessment (EIA) रिपोर्ट में तथ्यों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
इस पत्र की प्रतिलिपि Central Pollution Control Board (CPCB), Chhattisgarh State Pollution Control Board (CSPCB) और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को भी भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी में आ चुका है।
INTUC और संगठनों ने दर्ज कराई लिखित आपत्तियां, रोजगार और EIA पर उठाए सवाल
INTUC के जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों द्वारा परियोजना के खिलाफ औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आपत्तियों में Draft EIA रिपोर्ट में पर्यावरणीय प्रभाव, उत्सर्जन नियंत्रण, पुनर्वास और रोजगार से संबंधित जानकारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के पूर्व वादों और कलेक्टर स्तर पर जारी निर्देशों के पालन की स्थिति को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
जनसुनवाई से पहले विरोध के आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद, अब सबकी नजर प्रभावित गांवों पर
परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के कई गांवों से पहले ही ज्ञापन, शिकायत और आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। इन आपत्तियों में पर्यावरणीय प्रभाव, रोजगार, पुनर्वास और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था।
अब जनसुनवाई को इन सभी आपत्तियों को आधिकारिक रूप से दोहराने और रिकॉर्ड में दर्ज कराने का सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में जनसुनवाई के दौरान दर्ज आपत्तियों का विशेष महत्व होता है, जो आगे की स्वीकृति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
जनसुनवाई बना अधिकार और रिकॉर्ड का निर्णायक मंच
पर्यावरणीय नियमों के अनुसार, जनसुनवाई वह प्रक्रिया है जिसमें प्रभावित व्यक्ति, संगठन और स्थानीय निवासी अपनी आपत्तियां, सुझाव और चिंताएं आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकते हैं। यह बयान स्थायी रिकॉर्ड का हिस्सा बनता है और आगे की स्वीकृति प्रक्रिया में इसका कानूनी महत्व होता है।
ऐसे में जिन लोगों और संगठनों ने पहले से लिखित रूप में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उनके लिए जनसुनवाई अपनी बात को आधिकारिक रूप से दोहराने और रिकॉर्ड में दर्ज कराने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
1600 मेगावाट और 16,611 करोड़ का निवेश, लेकिन सवालों के घेरे में विस्तार
कंपनी द्वारा Phase-III के तहत 2×800 मेगावाट की नई इकाइयां स्थापित करने की योजना है, जिसकी अनुमानित लागत 16,611 करोड़ रुपये बताई गई है। कंपनी का दावा है कि परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि केंद्र सरकार की जांच, संगठनों की आपत्तियों और पहले से दर्ज विरोध के कारण परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया पर सभी की नजर टिकी हुई है।
आज की जनसुनवाई तय करेगी आगे की दिशा
आज आयोजित जनसुनवाई केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के अधिकारों और परियोजना के भविष्य से जुड़ा निर्णायक चरण है। जिन मुद्दों को लेकर पहले शिकायतें और आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं, उनका दोहराया जाना और आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल होना आगे की पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पहले से दर्ज आपत्तियों और विरोध के सुर जनसुनवाई में किस रूप में सामने आते हैं, और क्या प्रभावित लोग अपने अधिकारों और चिंताओं को आधिकारिक रूप से दोहराते हैं।
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