शुक्रवार का काला दिन : जेसीबी की लापरवाही से ढही बाउंड्री वॉल, मलबे में दबकर डेढ़ वर्षीय मासूम गणेश की मौत… उबल पड़ा कोरबा

कोरबा। शहर के लक्ष्मण बन तालाब के समीप शुक्रवार को एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। कोतवाली थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन आवासीय फ्लैट के पीछे खाली जमीन पर निर्मित बाउंड्री वॉल का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर जेसीबी मशीन से खुदाई और समतलीकरण का कार्य चल रहा था। आरोप है कि मशीन ऑपरेटर की लापरवाही और बिना सुरक्षा इंतजाम के कार्य कराए जाने के कारण दीवार कमजोर होकर ढह गई।
दीवार गिरते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे तीन लोग दब गए, जिनमें डेढ़ वर्षीय मासूम गणेश कर्ष भी शामिल था। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। लेकिन मासूम गणेश को चिकित्सक नहीं बचा सके। अस्पताल में उसकी मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया।
हादसे में घायल दो युवक गंभीर रूप से उपचाराधीन हैं। उनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। घटना के बाद बस्तीवासियों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया था। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पहले भी असावधानीपूर्ण तरीके से कार्य किए जाने की शिकायत की गई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
मासूम की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग थाना कोतवाली पहुंच गए और संबंधित ठेकेदार, जेसीबी ऑपरेटर व निर्माण कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। लोगों का आक्रोश यहीं नहीं थमा। गुस्साए नागरिकों ने ओव्हरब्रिज और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। देखते ही देखते यातायात पूरी तरह ठप हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। समझाइश देने और माहौल शांत कराने का प्रयास जारी है। प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया है, लेकिन लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। साथ ही मृतक मासूम के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है।
घटना ने एक बार फिर शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए जाते तो शायद यह मासूम जिंदगी यूं असमय खत्म नहीं होती। समाचार लिखे जाने तक मुख्य मार्ग पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। पूरा कोरबा इस हृदयविदारक हादसे से स्तब्ध है और अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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