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छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : प्रत्यक्ष भर्ती राजस्व निरीक्षकों के लिए अलग वरिष्ठता सूची पर विचार के निर्देश

Gram Yatra Chhattisgarh
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बिलासपुर, 23 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने शुक्रवार को एक अहम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नति से आए राजस्व निरीक्षकों की अलग-अलग वरिष्ठता सूची तैयार किए जाने के मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए।

यह मामला न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष आया। याचिकाकर्ताओं हितेश कुमार वर्मा एवं 35 अन्य की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखते हुए कहा कि वे 2016 के विज्ञापन के आधार पर प्रतियोगी परीक्षा व दस्तावेज़ सत्यापन के बाद 5 जनवरी 2019 को राजस्व निरीक्षक बने।

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां

  • भर्ती नियम 2014 के तहत 25% पद प्रत्यक्ष सीधी भर्ती और 75% पद पदोन्नति से भरे जाते हैं।
  • प्रत्यक्ष भर्ती में स्नातक योग्यता अनिवार्य है, जबकि पदोन्नत पटवारी केवल 12वीं पास होते हैं।
  • दोनों धाराओं को एक ही वरिष्ठता सूची में रखने से पदोन्नत पटवारी, स्नातक प्रत्यक्ष भर्ती निरीक्षकों से ऊपर आ जाते हैं।
  • पदोन्नति के अवसर (ASLR, नायब तहसीलदार) पदोन्नत पटवारियों को मिलते हैं और प्रत्यक्ष भर्ती निरीक्षकों को नज़रअंदाज़ किया जाता है।
  • 1 जून 2023 के आदेश में केवल पदोन्नत निरीक्षकों को ASLR पद पर पदोन्नति के लिए चुना गया।

अधिवक्ता सिद्दीकी ने तर्क दिया कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। उन्होंने कृषि विभाग का उदाहरण भी दिया, जहां स्नातक और गैर-स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की अलग-अलग वरिष्ठता सूचियाँ बनाई जाती हैं।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार को इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं है। सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर नियमों और सेवा विनियमों के अनुसार निर्णय लेंगे।

हाईकोर्ट का आदेश

अदालत ने कहा कि इस चरण पर वह मामले के गुण-दोष में नहीं जाएगी। लेकिन न्यायहित में याचिकाकर्ताओं को स्वतंत्रता दी गई कि वे चार सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करें।

साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि यदि अभ्यावेदन दिया जाता है तो राज्य सरकार तीन माह की अवधि में कारणयुक्त व स्पष्ट आदेश पारित करे।

महत्त्वपूर्ण रूप से, न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद ने टिप्पणी की कि—

  • प्रत्यक्ष भर्ती और पदोन्नति से आए निरीक्षक वास्तव में दो अलग-अलग धाराएँ हैं।
  • इसलिए उनकी वरिष्ठता सूची भी अलग-अलग बनाई जानी चाहिए।
  • कृषि विभाग का मॉडल राजस्व विभाग में भी लागू किया जा सकता है।

 यह फैसला राजस्व विभाग के हजारों निरीक्षकों की सेवा-स्थितियों और पदोन्नति के अवसरों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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