बिलासपुर कलेक्टर की अनुकरणीय पहल – पशु व जनहित में सराहनीय कदम

बिलासपुर कलेक्टर की अनुकरणीय पहल – पशु व जनहित में सराहनीय कदम
बिलासपुर। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो जन और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उनकी पहल न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन रही है।
कलेक्टर अग्रवाल ने ऐसे मवेशी पालकों पर सख्ती बरतनी शुरू की है जो आवारा पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि आए दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं। उन्होंने नगर निगम और संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर घूमते मवेशियों को जब्त कर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, लापरवाह पशुपालकों पर जुर्माना लगाने और दोहराव की स्थिति में पशुपालन से प्रतिबंधित करने जैसी ठोस व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी काम शुरू हो चुका है।
राज्य शासन को अपनानी चाहिए यह नीति
बिलासपुर में उठाए गए इस कदम को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने की जरूरत है। राज्य शासन को चाहिए कि वह इस दिशा में एक ठोस और एकरूप नीति बनाए ताकि प्रदेशभर में सड़कों पर मवेशियों की वजह से होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई की जरूरत
आवारा पशुओं की समस्या केवल नागरिकों की परेशानी नहीं है, यह एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक संकट बन चुकी है। ऐसे में यह जरूरी है कि राज्य शासन सख्त कानून बनाए और यह सुनिश्चित करे कि कोई भी पशुपालक अपने पशुओं को सार्वजनिक सड़कों पर छोड़ने की गलती न करे। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो और दोषियों को दंड मिले।
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल की इस पहल से यह उम्मीद जगी है कि यदि अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की प्रशासनिक गंभीरता दिखाई जाए तो यह समस्या जल्द ही काबू में लाई जा सकती है।
जरूरत है कि अब अन्य जिलों के कलेक्टर और राज्य शासन इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि सड़कों पर आम जनता और पशुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।