August 29, 2025 |

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बिलासपुर में आर्किटेक्ट फर्जीवाड़ा : 10 साल से चल रहा था नक्शा पासिंग का खेल, असली खुलासा अब हुआ

Gram Yatra Chhattisgarh
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बिलासपुर। ये कोई एक-दो साल की लापरवाही नहीं, बल्कि एक दशक से जारी तकनीकी धोखाधड़ी है, जिसमें एक फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर 400 से अधिक भवन नक्शे पास कर दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि जिस विकास सिंह को नगर निगम के भवन शाखा ने वर्षों तक “आर्किटेक्ट” मानकर दर्जनों निर्माण स्वीकृतियां दीं, वह दरअसल आर्किटेक्ट है ही नहीं—बल्कि एक सामान्य इंजीनियर है, वह भी बिलासपुर का नहीं।

नगर निगम ने 10 साल तक आंख मूंदकर विकास सिंह के नाम पर नक्शे पास किए। जैसे ही हकीकत सामने आई, निगम ने हड़बड़ी में उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया। मगर सवाल उठता है—इतने साल तक निगम के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?

आर्किटेक्ट नहीं, इंजीनियर निकला विकास सिंह

आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने खुलासा किया कि विकास सिंह वास्तु अधिनियम 1972 के अंतर्गत पंजीकृत रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट नहीं है। इसके बावजूद उसने कई प्रपोजल में खुद को आर्किटेक्ट बताया और सुपरविजन का शपथ पत्र भी दिया। मामला तब खुला जब महक आहुजा के प्रपोजल (11209) में विकास सिंह ने आर्किटेक्ट बनकर ऑनलाइन सहमति दी और बाद में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया गया।

नोटिस पर जवाब नहीं, फिर भी चलते रहे खेल

इस फर्जीवाड़े पर जब नोटिस जारी किए गए—पहला 26 जून 2025 को और दूसरा 16 जुलाई 2025 को—तो विकास सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसका लाइसेंस निलंबित कर ब्लैकलिस्ट किया गया, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

टीएंडसी की भूमिका भी संदिग्ध

अब इस फर्जीवाड़े की कड़ियाँ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) से भी जुड़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, टीएंडसी में पदस्थ एक खटराल कर्मचारी ने विकास सिंह को आर्किटेक्ट के रूप में रजिस्टर्ड करवा दिया और वर्षों तक यह खेल जारी रहा। इतनी गहरी सेटिंग कि एक ही दिन में 29 फाइलें ओके कर दी गईं।

150 से ज्यादा लेआउट पास, फर्जी सील-सिक्कों का इस्तेमाल

टीएंडसी और नगर निगम दोनों जगह विकास सिंह के नाम से 150 से ज्यादा लेआउट भी पास कराए गए। आरोप है कि फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग कर ये फाइलें बिना किसी आपत्ति के मंजूरी पा गईं। निगम और टीएंडसी के अफसर या तो इसमें शामिल थे या जानबूझकर आंख मूंदे रहे।


अब सवाल ये उठता है :

  • जब विकास सिंह रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट ही नहीं था, तो नगर निगम ने उसके नक्शे कैसे पास किए ?
  • टीएंडसी में बैठे अधिकारी इस फर्जीवाड़े को इतने साल तक कैसे नजरअंदाज करते रहे ?
  • क्या इस पूरे खेल में भ्रष्टाचार की मोटी परतें छुपी हैं ?
  • और आखिर कौन हैं वे अंदरूनी अफसर, जो हर फाइल को बिना जांच के मंजूरी देते रहे ?

 

 

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