
कोरबा।
सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिसे इलाज का मंदिर कहा जाता है, आज मौत का कब्रिस्तान बन चुका है। यहां फैली लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इस बार एक 8 साल के मासूम बच्चे की जिंदगी निगल ली।
पत्थलगांव से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे चौहान परिवार का सपना उस वक्त चकनाचूर हो गया जब उनके बेटे नंदलाल चौहान की मौत अस्पताल की गंदी व्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
डॉक्टरों ने खून चढ़ाने का आदेश दिया। सैम्पल लिया गया और लैब भेजा गया। लेकिन ड्यूटी पर बैठी टेक्नीशियन शालिनी आदित्य ने मासूम का असली ब्लड ग्रुप “O पॉजिटिव” की जगह “B पॉजिटिव” दर्ज कर दिया। यही फर्जी रिपोर्ट परिजनों को थमा दी गई और उन्हें ब्लड बैंक भेजा गया।
निजी ब्लड बैंक बिलासा में जब क्रॉस मैच हुआ तो पूरा झूठ खुला। बच्चा असल में O पॉजिटिव था। इसके बाद दोबारा पर्ची बनी, नया डोनर खोजा गया और 3–4 घंटे जाया हो गए। लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं।
डीन खानापूर्ति करते हैं, पर असली साम्राज्य गोपाल कंवर का
टेक्निकल रूप से मेडिकल कॉलेज का हेड डीन होता है और वह कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों को देखता है। लेकिन अस्पताल की कमान और पूरा सुपरविजन मेडिकल सुपरिटेंडेंट के हाथों में होता है। निरीक्षण से लेकर आदेश जारी करने तक – अस्पताल के संचालन का हर फैसला सुपरिटेंडेंट करता है।
लेकिन यहां स्थिति उलट है। डीन डॉ. कमल किशोर सहारे खानापूर्ति के लिए नोटिस जारी करते हैं, जबकि असली जिम्मेदारी उठाने वाले डॉ. गोपाल कंवर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। यह उनका हमेशा का रवैया रहा है – हर काम में झोल, कमीशन और निजी फायदे का खेल चलता है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही का चेहरा – डॉ. गोपाल कंवर
अस्पताल स्टाफ और परिजनों का कहना है कि गोपाल कंवर की प्राथमिकता कभी मरीजों की जान नहीं रही।
- दवाइयों की खरीद
- उपकरणों की फर्जी मेंटेनेंस
- फर्जी तरीके से टेंडर आबंटन
- फर्जी तरीके से टेंडर एक्सटेंशन देना
हर जगह पैसा पहले, मरीज बाद में। यही वजह है कि बार-बार मरीजों की जान खतरे में पड़ती है और दोषियों को बचा लिया जाता है।
कुछ महीने पहले भी नर्स मेनका लहरे की गलती से एक मरीज की जान पर बनी थी। लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज फिर वही कहानी दोहराई गई और इस बार शिकार बना एक मासूम बच्चा।
जनता का गुस्सा उफान पर
बजरंग दल जिला संयोजक राणा मुखर्जी ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों और सुपरिटेंडेंट पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो इसे “एक हिंदू मासूम की हत्या” मानकर उग्र आंदोलन होगा।
लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल अब इलाज का स्थान नहीं, बल्कि गोपाल कंवर का भ्रष्ट साम्राज्य है – जहां हर गलियारे में पैसों का खेल चलता है और जिंदगी की कोई कीमत नहीं।