20 लाख का काम, 12 लाख अटका : अटल प्रतिमा के सामने आमरण अनशन, एक दिन में झुका विभाग ?

कोरबा। नगर पंचायत छुरीकला में ‘अटल परिसर निर्माण एवं मूर्ति स्थापना’ कार्य के भुगतान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। लगभग 20 लाख रुपये के कार्य का भुगतान नहीं मिलने से नाराज़ ठेकेदार को आखिरकार आमरण अनशन का सहारा लेना पड़ा। अनशन शुरू होते ही विभाग बैकफुट पर आ गया और 11 फरवरी को शत-प्रतिशत भुगतान करने का लिखित आश्वासन जारी किया गया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में अग्रवाल एजेंसी कटघोरा को नगर पंचायत छुरीकला के अंतर्गत ‘अटल परिसर निर्माण एवं मूर्ति स्थापना’ का कार्य सौंपा गया था। ठेकेदार अनिल अग्रवाल ने अनुबंध की शर्तों के अनुसार समय पर कार्य पूर्ण कर परिसर का लोकार्पण एवं हैंडओवर भी कर दिया। इसके बावजूद छह माह बीतने के बाद भी उन्हें केवल 40 प्रतिशत भुगतान ही प्राप्त हुआ।
शेष लगभग 12 लाख रुपये के भुगतान के लिए ठेकेदार को लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। आरोप है कि बार-बार निवेदन के बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
9 फरवरी तक दी थी चेतावनी
ठेकेदार द्वारा प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि 9 फरवरी 2026 तक भुगतान नहीं होने की स्थिति में वे आमरण अनशन पर बैठेंगे। निर्धारित समय सीमा तक राशि जारी नहीं होने पर 10 फरवरी से वे श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के समक्ष अनशन पर बैठ गए।
अनशन की खबर फैलते ही राजनीतिक हलचल
अनशन की सूचना मिलते ही स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोरेलाल यादव तथा जिला ठेकेदार संघ के सचिव एवं नगर निगम कोरबा ठेकेदार संघ के अध्यक्ष असलम खान मौके पर पहुंचे और समर्थन जताया।
असलम खान ने कहा कि यह समस्या केवल एक ठेकेदार की नहीं, बल्कि निविदा लेकर काम करने वाले अधिकांश ठेकेदारों की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान 40-40-20 प्रतिशत भुगतान प्रणाली ठेकेदारों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर रही है। समय पर भुगतान नहीं होने से छोटे और मध्यम ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है।
विभाग ने जारी किया लिखित आश्वासन
नगर पंचायत छुरीकला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि उपअभियंता द्वारा प्रस्तुत बिल के आधार पर 11 फरवरी 2026 को देयक का लेखा परीक्षण कर कार्यालय अवधि में शत-प्रतिशत भुगतान की कार्रवाई की जाएगी। पत्र में ठेकेदार से अनशन समाप्त करने का आग्रह भी किया गया है।

अब सबकी निगाहें 11 फरवरी पर टिकी हैं। यदि विभाग अपने लिखित आश्वासन के अनुरूप भुगतान करता है तो अनशन समाप्त होगा, अन्यथा आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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