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केंद्र ने 7 माह से रोकी राशि ,आकांक्षी जिला KORBA में PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन की रफ्तार पर लगा ब्रेक

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703 गांवों में से 107 में ही शुरू हो सकी जलापूर्ति ,हर घर जल पहुंचाने की मंशा को आगे बढ़ाने 150 करोड़ के फंड के तत्काल रिलीज की दरकार ,क्या सुध लेगी डबल इंजन की सरकार,जानें पिछड़ती योजना की जमीनी स्थिति

 

कोरबा । हर घर नल ,हर घर जल के नारों के साथ शुरू की गई पीएम मोदी की ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन पर डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी समूचे छत्तीसगढ़ समेत आकांक्षी जिला कोरबा में ब्रेक लग गई है। केंद्र सरकार द्वारा सिंगल विलेज स्कीम व मल्टी विलेज स्कीम के तकरीबन 150 करोड़ की राशि 7 माह से रोके जाने के कारण योजना के पूर्ण होने का इंतजार एक साल फिर आगे बढ़ गया ।

 

 

फंड के इंतजार में ठेकेदारों ने शेष कार्य आगे बढाने हाथ खड़े कर दिए हैं। नतीजन जहां 703 गांवों में से 107 गांवों में ही योजनांतर्गत सुचारू रूप से जलापूर्ति शुरू हो सकी है ,वहीं 3 ब्लॉक के 245 गांव के 3 लाख की आबादी को जलापूर्ति करने प्रगतिरत एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना का शेष 40 फीसदी कार्य की रफ्तार भी मंद पड़ गई है। डबल इंजन की सरकार में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्तीय संकट से मचे हाहाकार ने केंद्र के कथनी और करनी के दावों की पोल खोल कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

यहाँ बताना होगा कि देश के हर परिवार को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की सोंच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की मंशानुरूप केंद्र शासन का जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यों के समन्वय से हर घर नल हर घर जल के नारों के साथ जल जीवन मिशन की शुरुआत की है। जिसके तहत 20 घर से अधिक की आबादी वाले प्रत्येक गांवों के प्रत्येक घरों में पाइपलाइन रेफ्रोफिटिंग के माध्यम से शुद्ध जल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है। लेकिन बेहतर कार्ययोजना के अभाव ,तकनीकी पेचीदगियों ,आदि की पेंच में योजना की मियाद मार्च 2028 तक आगे बढ़ गई है।

 

 

लेकिन छत्तीसगढ़ में पिछले 7 माह से योजना की रफ्तार वित्तीय संकट की वजह से थम सी गई है। बात करें आकांक्षी जिला कोरबा की तो यहां कुल 703 गांवों में 1095 योजना स्वीकृत है। जिसमें से 458 गांवों में एकल ग्राम योजना ( सिंगल विलेज स्कीम ) तो शेष कटघोरा,पाली ,पोंडीउपरोड़ा के 245 गांव एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना (मल्टी विलेज स्कीम )में शामिल किए गए हैं। पीएचई विभाग जल जीवन मिशन के अंतर्गत इन दोनों योजनाओं के लिए (सिंगल विलेज स्कीम में तकरीबन 400 करोड़ रुपए एवं मल्टी विलेज स्कीम में 116 करोड़ रुपए ) तकरीबन 51
6 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है।

 

 

लेकिन अभी तक योजना पूर्ण नहीं हो पाई है। बात करें सिंगल विलेज स्कीम की तो महज 107 गांवों में ही विभाग सतत रूप से जलापूर्ति शुरू कर सकी है। अभी भी मल्टीविलेज स्कीम से हटकर देखें तो 351 गांवों में योजना को पूर्णता का इंतजार है। इन गांवों में ग्रामीणों को जल जीवन मिशन से एक बूंद तक पानी नसीब नहीं हुई। इस तरह देखें तो सिंगल विलेज स्कीम से महज 23 फीसदी गांवों में ही योजना के तहत जलापूर्ति शुरू हो सकी है।

 

 

मल्टीविलेज स्कीम में 60 फीसदी काम 30 फीसदी भुगतान ,115 करोड़ की तत्काल दरकार ,7 माह से फंड के अभाव में योजना लटी ,245 गांवों के लोगों का जलापूर्ति के लिए बढ़ता जा रहा इंतजार

अब बात करें 3 ब्लॉक पोंडी उपरोड़ा ,कटघोरा,पाली के 245 गांवों के तकरीबन 3 लाख के आबादी के प्यास बुझाने स्वीकृत एतमानगर मल्टीविलेज स्कीम की तो इस स्कीम भी रफ्तार भी 7 माह से मंद पड़ी हुई है। अनुबंध अनुसार इस योजना को 27 फरवरी 2025 को पूर्ण हो जाना था। लेकिन महज 60 फीसदी काम हो पाने की वजह से योजना का इंतजार एक साल और आगे बढ़ गई है।

 

 

शनिवार को औचक निरीक्षण में पहुंचे नवपदस्थ कुणाल दुदावत ने योजना के निर्माण कार्यों का जायजा लेने के बाद धीमी रफ्तार पर नाराजगी जता फर्म मेसर्स विंध्या टेली लिंक्स लिमिटेड को नोटिस जारी करने पीएचई के ईई को निर्देश भी दिए । बकायदा नोटिस जारी होने की बात भी कही जा रही है। लेकिन हमारी टीम ने नामचीन आदित्य बिड़ला ग्रुप के इस फर्म के कार्यों के धीमी रफ्तार के वास्तविक कारणों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जानकारी अनुसार फर्म ने 60 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया है ,लेकिन फर्म को महज 30 फीसदी राशि का ही भुगतान हुआ है।

 

385 करोड़ 90 लाख 82 हजार की लागत वाली योजना में फर्म को 231 करोड़ के काम करने के बावजूद 116 करोड़ का ही भुगतान हुआ है,115 करोड़ के बिल भुगतान के लिए पेंडिंग हैं। यही वजह है कि योजना की रफ्तार फर्म आगे नहीं बढ़ा पा रहा। गौरतलब हो कि योजना के अंतर्गत 28.5 MLD की जल शुद्धिकरण संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ) स्थापित की जानी है। 8 MBR भी स्थापित किए जाएंगे। 7 लाख 75 हजार 640 मीटर OPVC , DI पाइप बिछाई जा रही है जिसके माध्यम से लाभान्वित होने वाले 245 वाले गांवों में जलापूर्ति की जाएगी।

 

 

 

तो तत्काल रिलीज करने चाहिए 150 करोड़ ,सरकार की नीयत पर ही उठ रहे सवाल !

सिंगल विलेज स्कीम के दायरे में आने वाले 458 गांवों में से 107 गांवों में सतत जलापूर्ति के दावे किए जा रहे,लेकिन इन गांवों के स्कीम में भी फाइनल पेमेंट (अंतिम भुगतान)नहीं हुआ है ,लिहाजा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका। फर्मों द्वारा जमा 5% सुरक्षानिधि (SD) भी उन्हें वापस नहीं मिल पाएगी। जिला कार्यालय में सिंगल विलेज स्कीम के 30 करोड़ के बिल भुगतान के लिए पेंडिंग (लंबित)पड़े हैं,वहीं मल्टीविलेज स्कीम में भी 115 करोड़ का भारी भरकम बिल भुगतान के लिए लटका है। इस तरह देखें तो तकरीबन 150 करोड़ रुपए के भुगतान के तत्काल दरकार है ताकि योजना आगे बढ़ सके और सरकार की मंशानुरूप लोगों के घरों तक शुद्ध जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके।

 

 

 

  हालांकि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद इस महत्वपूर्ण योजना में वित्तीय संकट को लेकर सरकार की नीयत पर ही सवाल उठ रहे। अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो कर्जदार फर्मों की सड़क पर उतरने की स्थिति निर्मित हो सकती है। हालांकि फर्मों में अभी भी आश बंधी है कि सरकार जल्द फंड रिलीज कर इस समस्या का समाधान करेगी। उनके विरोध प्रदर्शन की नौबत नहीं आएगी।

 
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