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आदिवासी सीटों पर मिलेगा भगत की वापसी का लाभ

अंबिकापुर।जशपुर जिले में आदिवासी नेता पूर्व मंत्री गणेश राम भगत की भाजपा मे वापसी से पार्टी को आरक्षित सीटों पर लाभ मिल सकता है।जशपुर व सरगुजा जिले की सीटों पर श्री भगत का अच्छा प्रभाव है ।पार्टी यह फैसला पहले ले लेती तो शायद इसका ज्यादा लाभ मिलता। इस फैसले से यह भी साफ हो गया है कि जशपुर की सियासत में अब रणविजय की सुनी जा रही है।
टिकट कटने से नाराज गणेश राम भगत ने बगावत कर चुनाव लड़ा था। इसके बाद वे भाजपा से बाहर कर दिए गए थे।भाजपा से बाहर हुए लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। वनवासी कल्याण आश्रम के उद्देश्यों के तहत आदिवासी हितों के लिए काम करते रहे। धर्मांतरण के मुद्दे पर ईसाई मिशनरी के खिलाफ भी श्री भगत का अभियान जारी रहा। पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान श्री भगत ने भाजपा के स्टैंड को सही ठहराते हुए बयान दिए थे और पत्थलगड़ी आंदोलन को गलत ठहराया था। वनवासी कल्याण आश्रम के आयोजन में भी शरीक होने के बाद यह माना जाने लगा था कि देर सबेर उनकी पार्टी में वापसी हो जाएगी पर इस राह में जूदेव परिवार में युद्धवीर सिंह जूदेव व अन्य का विरोध आड़े आ रहा था।इस बीच सांसद रणविजय सिंह जूदेव ने श्री भगत की वापसी पर सहमति दी। पिछले दिनों श्री भगत की धर्मपत्नी के निधन के बाद संगठन के राष्ट्रीय नेता सौदान सिंह उनके निवास गए थे। तब से माना जाने लगा था कि देर सबेर आदिवासी नेता की पार्टी में वापसी हो जाएगी । सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने उनकी वापसी का आदेश जारी किया। इस फैसले से भाजपा को जशपुर, कुनकुरी ,पत्थलगांव के अलावा सीतापुर व लुंड्रा विधानसभा क्षेत्रों में भी लाभ मिल सकता है। श्री भगत की खासियत यह है कि वे पार्टी से बाहर रहने के बाद भी पार्टी लाइन के कामों में सक्रिय रहे ।उनकी यह सक्रियता अब पार्टी के काम आ सकती है ।भाजपा ने यह फैसला लेने में थोड़ी देर कर दी वरना पार्टी को इसका ज्यादा लाभ मिल सकता था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया है कि अब जशपुर जिले में रणविजय सिंह जूदेव के सुझाव पर पार्टी ज्यादा गंभीरता से अमल करती है। इस चुनाव में यदि जशपुर जिले का परिणाम बेहतर आता है तो रणविजय का कद और बढ़ेगा।

 
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