August 31, 2025 |

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छत्तीसगढ़

मोर संग चलव रे… के रचयिता लक्ष्मण मस्तुरिया नहीं रहे

Gram Yatra Chhattisgarh
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मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा… जैसा अजर अमर गीत रचने वाले कवि एवं गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया का आज निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक वे कुछ दिनों से वायरल बूखार से पीड़ित थे। आज सुबह उन्होंने सीने में दर्द होने की शिकायत की। परिवार के सदस्य जब उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे, रास्ते में निधन हो गया। लक्ष्मण मस्तूरिया का जन्म 7 जून 1949 को मस्तूरी में हुआ था। स्कूल के दिनों से उन्हें लिखने पढ़ने का शौक था। आगे चलकर इस शौक ने उन्हें शीर्ष पर पहुंचा दिया। सत्तर के दशक में उनकी जाने-माने कवि एवं गीतकार के रूप में पहचान बन चुकी थी। जब टेलीविजन लोगों की पहुंच से दूर था, लक्ष्मण मस्तुरिया का लिखा और गाया गीत मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा… हर किसी की जुबान पर चढ़ चुका था। मस्तुरिया जब किसी कवि सम्मेलन के मंच पर कवि के रूप में आसीन रहते तो श्रोताओं की तरफ से यही फरमाइश होती थी, मोर संग चलव रे सुनाएं। सन् 2000 में जिस मोर छंइहा भुंइया से छत्तीसगढ़ी फिल्मों का दौर लौटा उसमें मस्तुरिया के लिखे गीतों ने धूम मचा दी थी। उसके बाद एक और छत्तीसगढ़ी पिल्म मोर संग चलव रे में मस्तुरिया के वही लोकप्रिय गीत मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा… को शामिल किया गया। मोर संग चलव रे में यह गीत हिन्दी सिनेमा के जाने-माने गायक सुरेश वाडेकर की आवाज में था। इसी वर्ष लक्ष्मण मस्तुरिया ने छत्तीसगढ़ी फिल्म मया मंजरी का लेखन कर उसका डायरेक्शन भी किया। यह फिल्म बनकर तैयार है। इसे विधि का विधान कहें अपनी पहली निर्देशित फिल्म को देखने मस्तुरिया इस संसार में नहीं हैं।

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