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कॉंग्रेस के कंट्रोल रूम के जवाब में बीजेपी का हेल्प डेस्क,,,,, समाजिक संस्थाओं के कंधे के इस्तमाल के बाद भी सफल न हो सके ,राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य…

सांसद व विधायक दे रहे निस्वर्थ सेवा,,,

कॉंग्रेस के कंट्रोल रूम के जवाब में
बीजेपी का हेल्प डेस्क,,,,,

समाजिक संस्थाओं के कंधे के इस्तमाल के बाद भी सफल न हो सके ,राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य

ग्रामयात्रा बिलासपुर से विशेष ,,,,,,,,

बिलासपुर,,,, आपदा को अवसर यू तो बहुतों ने बनाया इस कोरोनकाल मे तो इस भयावह स्थिति को अवसर बनाने से चूक न करते हुए,राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य पदाधिकारी भी पीछे नही रहे बड़ी बड़ी बात करते हुए प्रेस विज्ञप्ति के द्वारा अपने आप को महान समाजसेवी के रूप में प्रस्तुत करते हुए, विश्व स्तरीय घोषणा की अनुभूति प्राप्त करते हुए जहाँ कॉंग्रेस ने पहल करते हुए कंट्रोल रूम की स्थापना की 4 भागो में कार्य विभाजन करते हुए,4 प्रमुख लोगो की नियुक्ति की व उन 4 समाजसेवियों के लिए जंबो टीम कार्यकर्ताओ की खड़ी कर दी,,,

तो बीजेपी भी कैसे हाथ पर हाथ धरे रह सकती थी,,आनन फानन में बीजेपी ने भी फेशबुकिया युवाओ को जोड़कर बीजेपी कार्यालय में डेस्क प्रारंभ कर खुद की पीठ थपथपा ली,,,

नेतागिरी की दुकान चलाने के लिए समाजसेवी संस्थाओं के कंधे का किया उपयोग,,,

अब चूंकि आपदा है,इसे अवसर में बदलना नेताओ से अच्छा कौन जानता है,पर इस कार्य को मूर्त रूप देने में लाखों का खर्च आएगा,

तो ये खर्च नेतागिरी कर रहे नेताओ के स्वभिमान के खिलाफ था,कुछ लोग महज इस लिए भी इस टीम में शामिल हुए की चंदाखोरी करके कुछ रकम की व्यवस्था खुद के लिए कर लेंगे,

पर यहाँ भी उन्हें मुँह की खानी पड़ी क्योंकि जो लोग मदद हेतु आगे आ रहे थे,वो लोग सुवर की आंख के बालों से परिचित है,

और एक सिरे से विलासा माई के कर्मठ समाजसेवी राजनीतिक सदस्यों को एक सिरे से नकार दिया व उन्हें मदद करने से साफ मना करते हुए,आपदा को अवसर न बनाने की सलाह दें डाली चंदाखोरी की दुकान न चल पाने के दुख से व्यथित राष्ट्रीय पार्टी के चंदाखोर कार्यकर्ता कन्नी काटना चालू कर दिया जिसका परिणाम ये हुवा की मदद हेतु स्थापित पवार हाउस बन्द होने की कगार पर आ गए है,

सहायता केंद्र छलावा,,,,

राष्ट्रीय पार्टियों के द्वारा संचालित आपदा केंद्र का कार्य व खर्च आपदा राहत में लगी टीम समाजसेवी संस्था व्यक्ति विशेष के द्वारा ही किया जा रहा बस अंतर यह है कि आपदा केंद्र पर बैठे ऊर्जावान सदस्य मदद मांगने वाले कि सहायता खुद सहायता मांग कर करते है,

जो संस्था उक्त कार्य मे लगी है,और जैसे ही पीड़ित की समस्या के समाधान होने की जानकारी समाजिक संस्था देती है,तो बिना समय गवाए फेशबुकिया नेता पीड़ितों के परिजन के साथ फोटो खिंचवा कर अपनी पीठ खुद थपथपा लेती है,,,,

राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओ ने आर्थिक मदद से बनाई है,दूरियां,,,

कोरोनकाल में खुद को हीरो बताने य हीरो के रूप में स्थापित होने के लिए दोनों पार्टियों के दिग्गज सोशल मंच का भरपूर सहारा तो ले रहे वरन अपनी जेब से धन खर्च करने में बाजू झांकने में परहेज नही कर रहे है,

चमकदार कलफ लगे कुर्ते पैजामे के साथ ब्रांडेड चश्मे के साथ अपने चार पहिये वाहन से उतर कर बन्द मोबाइल में बात करते हुए,

बड़े बड़े अधिकारियों की क्लास लेते देखे जा सकते है, ऐसा नही है कि सभी नेतागण ऐसा कर रहे पर मुठी भर ही नेता पदाधिकारी सदस्य है जो स्वयं या अपनी टीम के साथ जरूरत के सामानों की व्यवस्था करके पार्टी के कार्यकर्ताओं से दर किनारा करते हुए अपनी टीम के माध्यम से जन सेवा में जुटे हुए,

और पेपर सोशल मंच की शोभा बनने की भी कोशिश नही कर रहे,,,,

ऐसा नजारा संपूर्ण 36 गढ़ में नही ये सिर्फ बिलासपुर में ही देखने को मिल रहा है,,

 

सांसद व विधायक दे रहे निस्वर्थ सेवा,,,

बिलासपुर सांसद श्री अरुण साव व विधायक शैलेष पांडेय अपनी भूमिका का निर्वहन जनता सेवा व जन हित मे लगातार करते है,
जिससे जनता वाकिफ है,

पर जनाब ये राजनीति है,पार्टियों के बड़े नेताओं के छोटे चमचे सांसद व विधायक के कार्यप्रणाली में ही प्रश्न चिन्ह लगाते हुए अपने आकाओं को अपनी कार्यकुशलता का प्रमाण सोशल मंच पर जारी उनकी वीर गाथा को दिखा कर कर रहे,,,,,

अपने आप को वरिष्ठ नेताओं में समझने वाले नेताओं की नही खोज खबर,,,,

अगर देखा जाये, तो थाने में ट्रैफिक पुलिस निगम में नेतागिरी की दुकान खोल कर बड़ी बड़ी बात करने वाले तो विलुप्त है ही,

साथ उनके पूर्व विधायक, महापौर, जिलाध्यक्ष, व विभन्न प्रकार के पद की कमान संभाल चुके कोई भी नजर नही आया,

ह इनका राष्ट्रीय स्तर का सुझाव आया अमल भी हुवा पर परिणाम वही नेतागिरी,,,

आखिर बिलासपुर के प्रखर विद्वानों को शर्म व अक्ल कब आएगी की अभी नेतागिरी का समय नही,

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