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कोरबा की हवा हुई ज़हरीली, 28 गुना अधिक बढ़ा प्रदूषण

कोरबा में वायु प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक के स्तर से लगभग 28 गुना अधिक पाया गया है जो कई तरह की बीमारियों खासकर फेफड़े और हृदय पर सीधा असर डालने का कारण भी बन रहा है।

ऊर्जाधानी की हवा बहुत ही खराब और जहरीली हो चुकी है। कोरबा की वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। कोयला और बिजली की नगरी कोरबा में वायु प्रदूषण का यह आलम तब सामने आया जबकि कोविड-19 के कारण आसमान साफ थे। राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र (एसएचआरसी) ने शोध के लिए कोरबा से मार्च 2021 से जून 2021 के बीच 14 सैम्पल लिए थे। यह कोविड-19 के संक्रमण का दौर था। जांच के लिए संग्रहित सैम्पल में भारी मात्रा में हानिकारक सिलिका, निकल, शीशा और मैग्नीज के कण प्रमुख रूप से और बड़ी मात्रा में पाए गए। कोरबा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 के स्तर पर पाया गया है जो कि राष्ट्रीय मानक स्तर (60 यूजी/एमएक्स) के अनुसार लगभग 28 गुना और रायपुर में लगभग ग्यारह गुना अधिक है।

पीएम का मतलब होता पार्टिकुलेट मैटर और 2.5 और 10 इस मैटर या कण का आकार होता है। दिखने वाली कण नाक में घुसकर म्यूकस में मिल जाती है, जिसे हम साफ कर सकते हैं, लेकिन पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 का आकार इतना छोटा होता है कि यह आंखों के लिए अदृश्य होने के कारण बहुत हानिकारक होता है। पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 माइक्रोस्कोपिक डस्ट पार्टिकल होते हैं, यानी इतने सूक्ष्म कि देखने के लिए माइक्रोस्कोप यानी सूक्ष्मदर्शी की जरूरत पड़ जाए। हालांकि इनका हमारे शरीर में घुसना और नुकसान पहुंचाना बहुत आसान होता है।

शोध के मुताबिक हवा के नमूनों के परिणाम चिंताजनक हैं। इसमें पाए गये हानिकारक पदार्थों का स्तर बहुत ज्यादा है जो कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि पीएम का स्तर अगर 2.5 या उससे ज्यादा है तो उसका सीधा असर फेफड़े और हृदय पर पड़ता है। अनुसंधान ने यह भी साबित किया है कि नवजात शिशुओं में जन्म दोष उत्पन्न हो सकता है। यह लोगों में सांस की बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रोक और मानसिक असंतुलन भी पैदा कर सकता है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता पुनीत कुमार ने बताया कि कोरबा से वायु के नमूनों के परिणाम बताते हैं कि इस क्षेत्र में पिछले दो वर्षों की अवधि में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है।

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