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देहावसान के 2 महीने बाद भी मुस्कुराता मिला बौद्ध भिक्षु का शरीर,,,जानिए क्या है पूरा मामला

मौत के बाद जब मृत शरीर को दफनाया जाता है तो आमतौर पर वह हफ्ते अथवा दस दिन में नष्ट हो जाता है, लेकिन हम आपको थाईलैंड के एक ऐसे बौद्ध भिक्षु के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके शव पर निधन के दो महीने के बाद भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा. एक रस्म निभाने के लिए थाईलेंड के एक बौद्ध का शव दो महीने बाद कब्र से निकाला गया था. बौद्ध भिक्षु का शव जिस हाल में कब्र से बाहर निकला उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. दरअसल बौद्ध भिक्षु के शरीर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा था और उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

16 नवंबर 2018 में बौद्ध भिक्षुओं के गुरु लुआंग फोर पियान का 92 वर्ष की आयु में निधन हुआ था. मौत के बाद उन्हें उसी मंदिरमें दफना दिया गया जहां वे सेवा करते थे. ठीक दो महीने बाद एक रस्म निभाने के लिए उनका शव कब्र से बाहर निकाला गया. जब शव को बाहर निकाला गया तो लुआंग के शरीर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा था और चेहरे पर मुस्कान थी. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानों वह चैन की नींद सो रहे हों.

बौद्ध भिक्षु के शव को देखकर एक्सपर्ट भी हैरान रह गए. एक एक्सपर्ट ने कहा कि शव देखकर ऐसा लगता है मानों उन्हें मात्र 36 घण्टे पहले दफनाया गया हो. तब भक्तों ने कहा था कि उनके चेहर की मुस्कान बता रही है कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो चुकी है.

आपको बता दें कि बौद्ध भिक्षु के निधन के दो महीने बाद एक खास रस्म निभाई जाती है. सबसे पहले भिक्षु के शव को कब्र से निकालकर नए कपड़े पहनाए जाते हैं. इसके बाद 40 दिन तक प्रार्थनाओं का दौर चलता है. 100वें दिन फाइनल रेस्टिंग सेरमनी होती है, जिसमें भिक्षु को सदैव के लिए दफना दिया जाता है.

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